Poem | Deepshikha Chauhan

Instagram: @_nayaab_sanjh




वक़्त के हाथों मार खा रहे हैं,

जो कभी छोड़ गए थे,

आज लौटकर आ रहे हैं।


वो कभी कहते थे हमसे,

मेरे साथ मत चला करो,

आज भीड़ जमा करके,

हमें "अपना "बता रहे हैं।।


( -नायाब साँझ )