LOVE LETTER TO MY PREVIOUS SLEEP | Gautam Praveen Thapliyal

Instagram: @gaut.am01112001


रातों की नींदें बलखाती हुई मेरी पलकों पे बैठी है,

और रंग आंखों का उतरता जा रहा है

नींद की धुंध से मेरी आंखों का रंग उधाड़ता जा रहा है

अब तो इसे बादलों की रजाई चाहिए

इसे तो बस रोशनी की विदाई चाहिए

सामने आने वालों कुछ देर ठहर जाओ

मेरी आंखें अभी बंद है बस थोड़ी देर ठहर जाओ

दिल की कीवाड़ें अभी बंद है

पलकों को खोल अब देख सब को सकूंगा पर जाऊंगा

उनके पास ही जिनके खयालों में खोया हुआ था मैं

जब आखें मेरी बंद थी यह जो रातों की नींदें बलखाती हुई मेरी पलकों पे बैठी है

कोहरा कोहरा कर यह लपटें मेरी पलकों पे बैठी है