क्या वो प्यार था ? | Kishan kanjibhai prajapati

Instagram : _kaano143_




हुत कमाल की है ये इश्क़ नाम की चीज़ साथ हो लगता है सारा जहां साथ है ओर खफा हो तो लगता है सारा जहां खिलाफत है हम है विरल बड़े भोले ओर क्युट से पढ़ाई में भी हमारा इक्का अच्छे से चलता है यूं तो गोलमटोल है पर मोटे नहीं सब की नजर में एक आदर्श विद्यार्थीनी ओर सब की लाडली बॉय कट बाल ओर बहुत ही फ्रैंक सी कभी किसी से डरते नहीं स्वभाव लड़कियों जैसा पर दिखने में लड़के से कम नहीं स्कूल में भी हम लड़कों के कपड़े पहनकर जाया करते थे , हमे लगता था कि प्यार तो हमसे किसी को ना हो पाएगा ओर नहीं हमे कोई करेगा पर क्या करे भैया बता के थोड़ी ना होता है ये , जब साथ कुछ पल बिताए ओर खयालात क्या मिले पता ही नहीं चला कब हो गया साला (इश्क़) खैर हो गया है तो हो गया क्या कर सकते है । तो बात है कक्षा ११ की नया नया बोर्ड पास कर के एडमिशन लिया नई स्कूल में गवर्मेंट स्कूल थी ओर छात्र भी सभी वैसे । अनजानी सी जगह पे कुछ अपना पन साथ हो गया तो अब बात करते है विद्यार्थियों की , तो उस कक्षा में ३४ विद्यार्थी थे ओर उसमे २७ लड़कियां बचे वो थे लड़के हर क्लास की तरह कुछ बचे गैर हाजिर थे ओर पहले ही दिन हम मिले गौतम से बड़ा भोला सा था उसके बाल ऐसे थे जैसे कैसे भी कंघी फेर लो पर वो नहीं सीधे होंगे ओर चेहरे पे एक शांति थी भोले पन वाली , जितना भोला उतना ही पढ़ाई में डीम था बेचारा कद काठी से तो पूरा फौजी लगता था , मोटे ओर कड़क हाथ उसके बहुत सारे बाल ओर तना हुआ सिना, दूर से उसकी आंखो देख के लगता था एक आंख छोटी है सब उसको गोतू केह के पुकार ते थे । ओर हम ठहरे नए पहले दिन तो सब को देखने में ओर पहचान ने में ही बीता दिया उसका मित्र था करसन पतला सा ओर लंबी लंबी फेकने में उस्ताद ओर एक अनूप ऊसका नाम था राज भुरी आंखो वाला वो था क्लास का डॉन एक था अंकित । पहले तो सब नए नए से लगते थे ओर उतनी खास पहचान भी नहीं हम बैठ ते थे बीच में तीसरी वाली बेंच पे ओर वो बैठता था राइट साइड में अनिल के पास उसके पीछे उसकी गेंग वैसे तो कुछ खास नहीं पहचान थी हमारी पर नया था तो सब अप्सोरप कर रहे थे हमे ओर हम सब को गौतम से मिलने की शुरुआत हुई कभी कबार उसके साथ बैठने से ऐसे ही एकाद महीना निकल गया ओर हम हो गए स्कूल में सेट हमारी ओर गौतम की पहेचान जितनी तो दोस्ती हो ही गई ओर अचानक से को उसके बाल स्पाइसी करवा के आया तब हमारे दिल में हुई हलचल पता नहीं क्यू पर उसके लिए एक सॉफ्ट कॉर्नर बन गया वहीं आंखे पर नई चमक वहीं भोलासा चहेरा आज बहोट स्मार्ट लग रहा था , स्कूल यूनिफॉर्म में तो मानो कहर ढा रहा था मानो एक गंधर्व उतरा हो सब को काम वश करने जैसे सब उसकी ओर ऐसे देख रहे थे बस हम ही भोंदू उसके चहेरे पर पिघल गए , हमारे दिल को पता था हमे थोड़ी ना पता था कि वो प्यार था ऐसे ही दिन बीत ते गए ओर समय आने लगा इन्मतेहान का वो आता था उसकी बाइक पे ओर में आती थी चल के , अक्सर हम चल कर ही अपनी मित्र के साथ जाते थे पर वो भी उस दिन नहीं आयी ओर हम भी फ्रैंक व लड़के जैसे लगते थे ओर वो उस दिन वैसे उसकी बाइक में अक्सर करसन बैठता था ऐसे ही दिन बीत ते गए ओर समय आने लगा इन्मतेहान का वो आता था उसकी बाइक पे ओर में आती थी चल के , अक्सर हम चल कर ही अपनी मित्र के साथ जाते थे पर वो भी उस दिन नहीं आयी ओर हम भी फ्रैंक व लड़के जैसे लगते थे ओर वो उस दिन वैसे उसकी बाइक में अक्सर करसन बैठता था वो नहीं आया ओर हम जा रहे थे उसने पूछा कि साथ चलोगे तुम ? हम तो खुश हो गए ओर हां कहा उस दिन कुछ ऐसा लगा कि काश में यही पे ही बैठी रहूं उसके साथ ओर बस अब ये सीट मेरी है। यूं लगा सारी ज़िन्दगी उसके साथ ही रहूं ओर कभी ना छूटे पल भर के लिए लगा कि ये लम्हे में सब मिल गया । पर भैया किसको पता था कि यह वन साइड लव है खैर छोड़ो फिर तो रोज़ स्कूल जाने की इच्छा होती थी ठंडी में वो हमारे गर्म हाथ को कस के पकड़े रखता था ओर उसके हाथ बजोट ठंडे होते थे पर वहीं लम्हों में तो हम जी रहे थे सब बोरिंग सा था पर उसकी एक झलक के लिए तो सुबह सबसे जल्दी पहोंच जाया करते थे हम ओर जो कोई भी आता बस लगता वहीं है फिर तो लम्हे उड़ने लगे हमारे ओर लगता था जाके अभी दिल का हाल बयान करदे पर इतना आसान कहां था सब रिसेस में उसके लिए नाश्ता लेजाया करते थे ओर खाली डब्बे में उसकी उंगलियां ढूंढ़ते थे उस से हाथ मिला के उसी के हाथ को हमारे हाथ में ढूंढ़ना ये सब पागल पन सा था चालू क्लास में उसको ताड ना ये सब अच्छा लग ने लगा था थोड़े बाल भी बढ़ा ने का मन हो रहा था फिर आ गई exams ओर वो हमारे ठीक पीछे वैसे तो सिनसियर लोग डरा करते है पर पता नही उसके एक बार बुलाने से पूरी सप्लीमेंट पास कर देते थे ओर कुछ फर्क भी नहीं पड़ता था ओर फिर देखते देखते हमरा १२th की समाप्ति आने लगी ओर हमारी पक्की नहीं पर दोस्ती हो गई फिर भी कहीं ना कहीं कुछ दूरियां भी थी फरवेल निपटा के हम सब ने दे दी परीक्षा बोर्ड की ओर उसके बाद कॉलेज में एडमिशन फिर तो हमारा मिलना कम होने लगा ओर उसके मिलने के बहाने बढ़ने लगे ओर ऐसे ही हमारी दोस्ती पक्की वाली है पर कभी कभी लगता है कि वो इतना नासमझ कैसे होगा कि मेरा प्यार उसे कभी नहीं दिखा हर दफा हमारी आंखो ने उससे बेइंतहां इश्क़ किया है पर वो कभी पढ़ हिं नहीं पाया हर मुलाकात मे मैने उससे मिलने की खुशी सब से बयान की है पर उसके लिए ऐसी मुलाकाते तो रोज़ होती होगी , उसकी हर खुशी में हमने पूरी तरह शामिल होने की कोशिश की है पर को कभी मेरी खुशी बन हि नही पाई हर मुलाकात के अंत में ऐसा ही लगा जैसे वो अपना हो के भी कभी मेरा नहीं हो सकता , हर अहेसास में वो था पर वो कभी आहेसास ना बन पाया , कभी किसी मुलाकात की वजह ना बन पाया ओर हम सिर्फ मुलाकातों के लिए जी रहे थे अब तो हम लड़कों जैसे दोस्त है साथ में घूमना ओर उसके पीछे बैठ के उसका लड़कियों को ताड़ना हम अभी उसी में ही जी रहे थे ओर अब तो हमारे परिवार वाले भी एक दूसरे को पहेचान ते है ओर हम उसके घर भी जाया करते है कभी क़बार तो पूरी रात उसके साथ घूमने जाते है उसके दोस्त ओर हम उसकी बाइक पे पर अभी उसके ज़हन में तो दोस्ती ही है उसके हर जज़्बात को हम पढ़ लेते है पर अफसोस हमे तो अनपढ़ अपना मिला किसी ने कहा है ना जिसका मिलना मुकदर में नहीं होता उससे मोहोबत कमालकी होती है